History

परमश्रेष्ठ ऋषिवरविश्वामित्र मुनि की तपोस्थली एवं भगवती गंगा के समीप अवस्थितरामाधीनमिश्रभास्करोदयसंस्कृत महाविद्यालय देवढ़ियाँ,बक्सर ज्ञान-विज्ञान के लिए इस क्षेत्र में प्रख्यात है।भगवान भास्कर की भांति आज यह महाविद्यालय शिक्षा की सुरभित किरणें बिखेररहा है। जो इस क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।
1966 से स्थापित यह महाविद्यालय ग्राम्य क्षेत्र में अवस्थित होते हुए सर्वजन शिक्षा का सुलभ संस्थान के रूप में प्रख्यात है इस महाविद्यालय के स्थापना एवं विकास में ऋषितुल्यविद्वज्जन,आचार्य गण एवं ग्राम्यजन तथा प्रबुद्ध पुरुषों ने महत्त योगदान देकर इस कीर्तिलता को पुष्पित एवं पल्लवित किया है।
जो आज वट वृक्ष की भांति छाया रूपी शिक्षा का विस्तार कर रहा है तथा ग्रामीण क्षेत्र की गरिमा को गौरवान्वित कर रहा है
संस्था के संस्थापक पंडित रामाधीन मिश्र जी एवं आचार्य प्रवर श्री मिश्र जी ने संस्था को विकसित करने में संपूर्ण जीवन महर्षिच्यवन को अर्पित करते हुएजगत्विश्रुतहुए।इन मनीषियों के प्रति संस्था आज भी कृतज्ञ है। पूर्व प्राचार्य गण एवं आचार्य प्रवर ने विविध विषयों की पूर्ण मनोयोग से शिक्षा देकर छात्र-छात्राओंकोकर्मणिकुशलःकी तरह समाज में प्रतिष्ठित किये।
अतः आज शिक्षा की मंदाकिनीमंदमंदप्रभावित होती हुई सर्वत्रसभीकोअभिसिंचित कररहीहै तथा सभी छात्र छात्राएं एवं पिपासुजनअवगाहित हो रहे हैं।
इस प्रकार इस संस्था का इतिहास गौरवमय एवं अनुपमेय रहा है। आचार्य श्रेष्ठ मम्मट के काव्य प्रयोजन काव्यंयशसेअर्थकृते..कीतरह सर्वत्र अपना उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
सम्प्रतिहम सब समवेत रूप से इस संस्था के विकास के लिए कृत संकल्पित हैं विद्याधनं सर्वधनंप्रधानम्हम सबों का प्रेरणा का सूत्र है
इति शुभम।